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Monday, August 26, 2019

दर्द-ए-बयां

मेरी ऐसी रूह , जो मंज़िल-तस्कि पा ना सकें.....
अपने दर्द -ऐ-मोहब्बत के सपनो को, सजा न सकें।
जीने को जिये जाते है मगर,सांसो की रिदायें जलती है,
खामोस वफाये जलती है।
संगीन हवा जाड़ो में, ख्वाबों की चिताएं जलती है।
चंद लम्हों के बाद...
फिर से इस चाँदनी के नीचे ,दो सायें लहरायें है
फिर दो दिल मिलने आये है
इस पल भी मौत की आंधी उठी है,फिर जंग के बादल छाए है।

तब सोचा....की उनका ऐसा अंजाम ना हो,
उनका जुनून बदनाम ना हो
उनके नसीब में ,लहू में लिपटी शाम ना हो।

अपने प्यार की सुरुआत का वह शाम याद है मुझे,
चाहत की ख्वाबों का अंजाम याद है मुझे।

हमारे प्यार को दुनिया की नज़र लग गई
मुरादे तो पूरी नही हुई पर उसकी रात मिल गई
यहां तो कश्मकश दिल का दर्द ही लिखी है,
फिर भी रहता हूं खुस ,क्योकि 
हमे उनकी सुनहरी याद मिल गई।
                                              अनिकेत सिंह कुशवाहा

Wednesday, August 21, 2019

सायद ऐसा होता

आसमान से तारे तोड़ लाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे कदमो में जन्नत बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तुझे दुनिया की सेर करा, एक नया ही जहां दिखलाता
तेरी राहों में फूल बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे ख्वाब की हक़ीक़त बन, सपने सारे सच कर जाता
तेरे दर्द को खुद पर झेल जाता, अगर बस में मेरे होता
मैं खुद को तेरा आईना और एक तस्वीर निराली बनाता
तेरे आंसू को अपनी आँखों से गिराता, अगर बस में मेरे होता
तेरे लिए एक ताजमहल बनवाता, प्यार मेरा सबको दिखलाता
खुदा बन तेरी हर एक दुआ पूरी करता, अगर बस में मेरे होता
कितनी मोहब्बत हैं तुमसे मुझे ये तुम्हे समझाने के लिए
अपना दिल तेरे दिल में धड़काता, अगर मेरे बस में होता

कोई बात बने

आज पास तुम चले आओ, तो कोई बात बने
अपना मुझे भी बनाओ, तो कोई बात बने
मेरी हर सांस-o-एहसास ने तेरा एतबार किया
हर नजर ने, हर जज़्बे ने तुमसे इज़हार किया
आज हमे तुम भी चाहो, तो कोई बात बने
मोहबत्त तुम भी जताओ, तो कोई बात बने
आज वादा तुम भी निभाओ, तो कोई बात बने
एक कसम तुम भी खाओ, तो कोई बात बने
लिखें हैं ना जाने कितने नगमे इस प्यार ने
मांगी हैं कितनी ही दुआएं पल पल इस इन्तजार ने
आज गीत तुम भी गुनगुनाओ, तो कोई बात बने
एक ग़ज़ल तुम भी सुनाओ, तो कोई बात बने
बहुत हैं अरमान साथ तुम्हारे जीने का हमे
इश्क़ के पहलु में मुस्कुरा कर मरने का हमे
आज अगर तुम भी मान जाओ, तो कोई बात बने
दुनिया अपनी भी दिखाओ, तो कोई बात बने

एहसास

मिलते अगर हम तो क्या एहसास होते
धड़कते दिल में क्या क्या ज़ज़्बात होते
बहते आँखों से आंसू, या लब खिलखिलाते
या दोनों के संगम का, एक साथ ही एहसास  होते
 ढेर सारी बातें, या चुप मुस्कुराते
चलते साथ साथ और हाथो में हाथ होतेे
रुकते फिर बहाने से, देखने को आखें
निगाहों ही निगाहों में, उमड़ रहे वो प्यार होते
बैठ कर कही, सीने से तेरे लग जाते
रुक जाए अब पल यही, ऐसे हमारे बीचार होते
मिलते अगर हम , तो वो क्या एहसास होते
धड़कते दिल में क्या क्या ज़ज़्बात होते

Tuesday, August 6, 2019

बचपन की यादें

सुरु थी ममी -पापा की डांट,
बहन की दुलार, और
दादा-दादी का प्यार।.....

अभी भूले नही ..
अपने दोस्तों से झगड़ा,
बिना बात लड़ना।
पड़ोसियों के घर मे बॉल,
जान बूझ कर फेकना।

कहा गया वो बचपन ।।

प्राथमिक स्कूल की बात ही कुछ ग़जब थे..

हमारे हरकत थे सस्ते,  पर..
मास्टर साहब की छड़ी और झापड़ पर जाते 
थे महंगे।
मास्टर के सामने रोना, फिर..
एक दूसरे के लाल मुँह देख 
जोर जोर से हँसते।।

कहा गया वो बचपन।।।

याद आती है वो बचपन
जब आंगन में सोर मचाते 
सुबह को गयाब साम को आते
फिर पाप की झापर खाते।
और, रूठे कोने में मुँह बिचकाते
मम्मी-पापा मुझे मानते
चंद रुपयों की लालच दे कर ,
दादा-दादी पास बुलाते।

हट थी हमारी,
लगता था हर किसी से है अनबन,
भाग -दौड़ में कहा आ गए ..
जब याद आती  तो फिर दुहराते,
कहा गया वो बचपन।।।

                                   अनिकेत सिंह कुशवाहा


Tuesday, April 2, 2019

दिल की बात। (सच)

लौट आ..... ये ज़िन्दगी मेरी ओर,
तुझ बिन जिया नही जाता।
है बेरुखी इस दिल की ,
अब ये दूरिया सहा नही जाता।
खामोस है दिल ....पर,
झूठी मुस्कान किस काम की,
सच तो ये है ....
तन्हा यूं ही, ज़िन्दगी गुजरा नही जाता।
                                             अनिकेत सिंह कुशवाहा

Sunday, March 17, 2019

Intzar ( lovely poem)

फिर आज उनको दुआओं में मंगा था मैंने,
फिर आज उनको बेइंतहा चाहा था मैंने,
फिर आज मेरे खाबो-ख़यालो में थी शिर्फ़ वो,
फिर आज इंतज़ार में पलके सजाया था मैंने।
उसके बिना........
नींद भी नही आती रातो में
मानो, उम्र गुजर रही हो यादो में ।
उसके इंतज़ार में ........
मैं भी तन्हा रोता हु
उधर , खुस  वो भी नही,
मुझे लगता है....शायद,
सच्चे प्यार का मिलना
इस ज़िन्दगी में मंजूर  नही।
                                 अनिकेत सिंह कुशवाहा

Wednesday, February 20, 2019

MOST BEAUTIFUL POEM ( SAFAR ZINDGI KI )

                सफर ज़िंदगी कि 
सोचा था एक दिन , ज़िंदगी में कुछ कर बैठूंगा
पर कुदरत का करिश्मा तो देखो ,
मैंने कुछ किया तो , पर ये ना सोचा था। .....
की प्यार कर बैठूंगा
ज़िंदगी की सफर थी प्यारी
फ़िदा था तेरे मुस्कान पे ,
तरपता था तेरे दीदार के लिए। ...
पर पता ना था , की तेरे दिल में कोई जगह बना बैठूंगा।
तुमसे मिलना ,  बातें करना  लगता था दिल का खेल है
प्यार की राहों में तुझे जानकर ऐसा लगा ,
की दिल पे तेरा  नाम लिख  बैठूंगा
दिन गुजर रहे थे तरंगो की तरह
बिना किसी रुकावट के .......
तुझे पा कर मै खो गया  हो गया अकेला
दिल में झाँककर देखा तुम्हे
तब सोच लिया ज़िंदगी तेरे नाम कर बैठूंगा।
                                                        अनिकेत  सिंह  कुशवाहा 

lovely poem ( yesa lagta hai )

    ऐसा लगता है।

महफिल भी सुनी लगती है ,
तेरा कसर लगता है।
और हम भी खुश लगते है ,
तेरा ही असर लगता है।
है लगता हर पल सदियों सा 
बरसो सा बिन तेरे ,
तेरे दिल मे ही मुझे अब 
अपना घर सा लगता है।
है चाहता ये दिल ,हर पल तेरे दीदार को
तड़पता हुँ, बेचैन रहता हूँ
अब तो मामूली सा पत्थर भी , संगमरमर लगता है।
अनजान हुँ इस दुनिया की बातों से 
दिन ,साम और रातो से 
ना किसी के बातो का असर 
और ना ही वाकिफ थे हालातो से ।
हद पार कर जाऊंगा तेरे इश्क़ में 
दो जहांन इम्तहां के लिए
तो भी पाऊंगा तुझे याद करके, 
हमेसा चाहूंगा तुझे
मिट जाऊंगा तेरे प्यार में , ऐसा लगता है।
                                               अनिकेत सिंह कुशवाहा




दर्द-ए-बयां

मेरी ऐसी रूह , जो मंज़िल-तस्कि पा ना सकें..... अपने दर्द -ऐ-मोहब्बत के सपनो को, सजा न सकें। जीने को जिये जाते है मगर,सांसो की रिदायें जल...