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Tuesday, August 6, 2019

बचपन की यादें

सुरु थी ममी -पापा की डांट,
बहन की दुलार, और
दादा-दादी का प्यार।.....

अभी भूले नही ..
अपने दोस्तों से झगड़ा,
बिना बात लड़ना।
पड़ोसियों के घर मे बॉल,
जान बूझ कर फेकना।

कहा गया वो बचपन ।।

प्राथमिक स्कूल की बात ही कुछ ग़जब थे..

हमारे हरकत थे सस्ते,  पर..
मास्टर साहब की छड़ी और झापड़ पर जाते 
थे महंगे।
मास्टर के सामने रोना, फिर..
एक दूसरे के लाल मुँह देख 
जोर जोर से हँसते।।

कहा गया वो बचपन।।।

याद आती है वो बचपन
जब आंगन में सोर मचाते 
सुबह को गयाब साम को आते
फिर पाप की झापर खाते।
और, रूठे कोने में मुँह बिचकाते
मम्मी-पापा मुझे मानते
चंद रुपयों की लालच दे कर ,
दादा-दादी पास बुलाते।

हट थी हमारी,
लगता था हर किसी से है अनबन,
भाग -दौड़ में कहा आ गए ..
जब याद आती  तो फिर दुहराते,
कहा गया वो बचपन।।।

                                   अनिकेत सिंह कुशवाहा


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THANK YOU SO MUCH

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