सफर ज़िंदगी कि
सोचा था एक दिन , ज़िंदगी में कुछ कर बैठूंगा
पर कुदरत का करिश्मा तो देखो ,
मैंने कुछ किया तो , पर ये ना सोचा था। .....
की प्यार कर बैठूंगा
ज़िंदगी की सफर थी प्यारी
फ़िदा था तेरे मुस्कान पे ,
तरपता था तेरे दीदार के लिए। ...
पर पता ना था , की तेरे दिल में कोई जगह बना बैठूंगा।
तुमसे मिलना , बातें करना लगता था दिल का खेल है
प्यार की राहों में तुझे जानकर ऐसा लगा ,
की दिल पे तेरा नाम लिख बैठूंगा
दिन गुजर रहे थे तरंगो की तरह
बिना किसी रुकावट के .......
तुझे पा कर मै खो गया हो गया अकेला
दिल में झाँककर देखा तुम्हे
तब सोच लिया ज़िंदगी तेरे नाम कर बैठूंगा।
अनिकेत सिंह कुशवाहा
सोचा था एक दिन , ज़िंदगी में कुछ कर बैठूंगा
पर कुदरत का करिश्मा तो देखो ,
मैंने कुछ किया तो , पर ये ना सोचा था। .....
की प्यार कर बैठूंगा
ज़िंदगी की सफर थी प्यारी
फ़िदा था तेरे मुस्कान पे ,
तरपता था तेरे दीदार के लिए। ...
पर पता ना था , की तेरे दिल में कोई जगह बना बैठूंगा।
तुमसे मिलना , बातें करना लगता था दिल का खेल है
प्यार की राहों में तुझे जानकर ऐसा लगा ,
की दिल पे तेरा नाम लिख बैठूंगा
दिन गुजर रहे थे तरंगो की तरह
बिना किसी रुकावट के .......
तुझे पा कर मै खो गया हो गया अकेला
दिल में झाँककर देखा तुम्हे
तब सोच लिया ज़िंदगी तेरे नाम कर बैठूंगा।
अनिकेत सिंह कुशवाहा