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Tuesday, April 2, 2019

दिल की बात। (सच)

लौट आ..... ये ज़िन्दगी मेरी ओर,
तुझ बिन जिया नही जाता।
है बेरुखी इस दिल की ,
अब ये दूरिया सहा नही जाता।
खामोस है दिल ....पर,
झूठी मुस्कान किस काम की,
सच तो ये है ....
तन्हा यूं ही, ज़िन्दगी गुजरा नही जाता।
                                             अनिकेत सिंह कुशवाहा

दर्द-ए-बयां

मेरी ऐसी रूह , जो मंज़िल-तस्कि पा ना सकें..... अपने दर्द -ऐ-मोहब्बत के सपनो को, सजा न सकें। जीने को जिये जाते है मगर,सांसो की रिदायें जल...