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Sunday, March 17, 2019

Intzar ( lovely poem)

फिर आज उनको दुआओं में मंगा था मैंने,
फिर आज उनको बेइंतहा चाहा था मैंने,
फिर आज मेरे खाबो-ख़यालो में थी शिर्फ़ वो,
फिर आज इंतज़ार में पलके सजाया था मैंने।
उसके बिना........
नींद भी नही आती रातो में
मानो, उम्र गुजर रही हो यादो में ।
उसके इंतज़ार में ........
मैं भी तन्हा रोता हु
उधर , खुस  वो भी नही,
मुझे लगता है....शायद,
सच्चे प्यार का मिलना
इस ज़िन्दगी में मंजूर  नही।
                                 अनिकेत सिंह कुशवाहा

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